1خداوند درباره قومهای مختلف با من سخن گفت.2نخستين قوم، مصر بود. در سال چهارم سلطنت يهوياقيم (پسر يوشيا)، پادشاه يهودا، هنگامی كه سپاه نكو، پادشاه مصر، در نبرد كركميش در كنار رود فرات از نبوكدنصر، پادشاه بابل شكست خورد، خداوند دربارهٔ مصريان چنين فرمود:3«سرداران مصری به سربازان دستور میدهند كه سپرها را بردارند و به ميدان جنگ هجوم برند!4اسبها را زين كنند و سوار شوند. كلاهخود بر سر بگذارند، نيزهها را تيز كنند و زره بپوشند.5اما چه میبينم؟ لشكريان مصر از ترس در حال فرار هستند! قویترين سربازانشان بیآنكه به پشت سر نگاه كنند، پا به فرار گذاشتهاند! بلی، ترس و وحشت از هر سو بر آنان هجوم آورده است!6نه قویترين رزمندگانشان و نه سريعترين آنها، هيچيک جان به در نخواهند برد. در شمال، كنار رود فرات، همه میلغزند و میافتند.7«اين كدام سپاه نيرومندی است كه به پيش میرود و همچون رود نيل كه به هنگام طغيان، بالا میآيد، زمينهای اطراف را فرا میگيرد؟8اين لشكر مصر است كه با تكبر ادعا میكند كه مثل طغيان نيل، دنيا را خواهد گرفت و دشمنان را نابود خواهد كرد.9پس ای اسبان و عرابهها و سربازان مصر بياييد! ای اهالی سودان و ليبی كه سپرداران لشكر مصر هستيد، ای لوديان كه كماندارانش میباشيد، به پيش بياييد!10چون امروز، روز خداوند، خدای قادر متعال است! روزی است كه خداوند از دشمنانش انتقام میگيرد. شمشير او آنقدر میكشد تا سير شده، از خون شما مست گردد. امروز خداوند در سرزمين شمال، نزد رود فرات قربانی میگيرد.11ای مردم مصر برای تهيه دارو به جلعاد برويد! ولی برای زخمهای شما علاجی نيست. اگرچه داروهای بسيار مصرف نماييد، اما شفا نخواهيد يافت.12رسوايیتان به گوش همه رسيده و فرياد نااميدی و شكست شما دنيا را پر كرده است. سربازان دلير شما در ميدان جنگ میلغزند و روی هم میافتند.»
آمدن نبوكدنصر
13سپس خداوند دربارهٔ آمدن نبوكدنصر، پادشاه بابل و حملهٔ او به مصر، اين پيغام را به من داد:14«اين خبر را در همهٔ شهرهای مصر اعلام كنيد؛ در شهرهای مجدل، ممفيس و تحفنحيس آن را به گوش همه برسانيد: برخيزيد و آمادهٔ جنگ شويد، چون شمشير هلاكت، همهٔ اطرافيان شما را نابود كرده است!15چرا جنگجويان شما میافتند و بر نمیخيزند؟ چون خداوند آنها را بر زمين كوبيده است.16بسياری از آنها میلغزند و دستهدسته روی هم میافتند. آنگاه سربازان مزدور كه اهل سرزمینهای ديگر هستند، خواهند گفت: ”بياييد به زادگاه خويش و نزد قوم خود برگرديم تا از كشتاری كه در اينجاست، در امان باشيم!“17«نام جديدی به پادشاه مصر بدهيد؛ او را ”طبل توخالی“ بناميد؛ چون سروصدايش زياد است، ولی كاری از دستش برنمیآيد.18من، خداوند قادر متعال كه پادشاه همهٔ جهان هستم، به حيات خود قسم میخورم كه شخصی نيرومند بر مصر هجوم خواهد آورد؛ او مانند كوه تابور كه بلندتر از کوههای ديگر است و مانند كوه كرمل كه در كنار دريا سر به آسمان بركشيده، خواهد بود!19ای مردم مصر، اسباب خود را آماده كنيد و برای تبعيد مهيا شويد، چون شهر ممفيس به کلی ويران خواهد شد و موجود زندهای در آن باقی نخواهد ماند.20-21مصر مانند يک ماده گوسالهٔ زيباست؛ ولی يک خرمگس او را فراری خواهد داد، خرمگسی كه از شمال خواهد آمد! حتی سربازان مزدور مصر نيز مانند گوسالههای وحشتزده پا به فرار خواهند گذاشت، زيرا روز مصيبت و زمان مجازات ايشان فرا رسيده است.22-23با نزديک شدن سپاهيان دشمن، مصر مانند مار، صفير زنان خزيده، خواهد گريخت. آنها تيشه به ريشهٔ مردم مصر خواهند زد، همانطور كه چوب برها درختان را میبرند و جنگل انبوه را صاف میكنند. زيرا لشكر دشمن مانند دستهٔ ملخها بیشمارند.24مردم مصر با سرافكندگی مغلوب اين قوم شمالی خواهند شد.»25خداوند قادر متعال، خدای اسرائيل میفرمايد: «من بت آمون، خدای شهر تبس و بتهای ديگر مصر را نابود خواهم كرد. پادشاه و تمام كسانی را نيز كه به او اميد بستهاند، مكافات خواهم رساند،26و ايشان را به دست كسانی كه تشنهٔ خونشان هستند تسليم خواهم نمود، يعنی به دست نبوكدنصر، پادشاه بابل و سپاه او. ولی بعد از اين دوره، سرزمين مصر مجدداً آباد خواهد شد و مردم در آن زندگی خواهند كرد.27«ولی ای فرزندان بندهٔ من يعقوب، نترسيد؛ ای بنیاسرائيل، هراس به خود راه ندهيد! من شما و فرزندانتان را از نقاط دور دست و از سرزمين تبعيد، به وطنتان باز خواهم گرداند و شما در امنيت و آسايش زندگی خواهيد كرد و ديگر كسی باعث ترس شما نخواهد شد.28ای فرزندان بندهٔ من يعقوب، نترسيد! چون من با شما هستم؛ حتی اگر قومهايی را كه شما را در ميانشان پراكنده كردم، به کلی تار و مار كنم، ولی شما را از بين نخواهم برد؛ البته شما را هرگز بیسزا نخواهم گذارد؛ بلی، شما را يقيناً تنبيه خواهم نمود، ولی منصفانه و عادلانه.»
1Вот слово Господа, которое было к Иеремии о судьбах других народов.2О Египте. О войске египетского фараона Нехо[1], которое было разбито Навуходоносором, царем Вавилона, при Каркемише, возле реки Евфрата, в четвертом году правления иудейского царя Иоакима[2], сына Иосии.3– Готовьте щиты и большие, и малые, и выступайте в бой!4Седлайте коней и садитесь на них! Становитесь в строй, шлемоносцы! Точите копья и надевайте кольчуги!5Но что я вижу? Они испугались, они отступают, их воины побеждены. Они бегут без оглядки, и ужас со всех сторон, – возвещает Господь. –6Быстрый не убежит, и сильный не спасется. На севере у реки Евфрата они споткнутся и упадут.7Кто там вздымается, как Нил, как реки с бурными водами?8Египет вздымается, как Нил, как реки с бурными водами, говоря: «Поднимусь и покрою землю; погублю города и их жителей».9Скачите, кони! Мчитесь, колесничие! Выступайте, сильные воины: воины Куша, щитоносцы Пута и воины Луда, натягивающие луки.10Это день Владыки, Господа Сил, день возмездия для отмщения Его врагам. Будет меч пожирать, пока не насытится, пока не утолит жажду кровью. Это жертва Владыке, Господу Сил, в северных землях у реки Евфрата.11– Пойди в Галаад и возьми бальзам[3], девственная дочь Египта[4]. Напрасно ты лечишься многими снадобьями – нет тебе исцеления.12Народы услышали про твой позор; твой крик наполнил землю. Споткнулся о воина воин, и упали оба разом.13Вот слово, которое Господь сказал пророку Иеремии о будущем вторжении Навуходоносора, царя Вавилона, в Египет:14– Объявляйте в Египте, возвещайте в Мигдоле, возвещайте и в Мемфисе, и в Тахпанхесе: «Становись и готовься, Египет: меч уже пожирает тех, кто вокруг тебя».15Почему твои воины будут повержены? Они не смогут выстоять, потому что Господь повергнет их.16Они будут спотыкаться снова и снова, будут падать один на другого и говорить: «Вставайте, давайте вернемся к своему народу, на нашу родину, подальше от меча притеснителя».17Они воскликнут: «Фараон, царь Египта, – крикун, упустивший свою возможность».18Верно, как и то, что Я живу, – возвещает Царь, Чье имя Господь Сил, – придет тот, кто велик, как гора Фавор среди гор и как гора Кармил у моря.19Собирайте свои пожитки и готовьтесь к изгнанию, жители Египта, потому что Мемфис подвергнется разорению, станет необитаемой развалиной.20Египет – прекрасная телица, но с севера летит к ней слепень.21Даже наемники в войске Египта как тучные быки. Но они повернутся и вместе пустятся в бегство, и не устоят, потому что настал день их бедствий, время их наказания.22Зашипит Египет, как уползающий змей, так как близятся вражьи войска, и пойдут они на него с топорами, как дровосеки.23Они вырубят его лес, – возвещает Господь, – как бы ни был он густ, ведь они многочисленнее саранчи, нет им числа.24Дочь Египта будет опозорена, отдана в руки северного народа.25Господь Сил, Бог Израиля говорит: – Я накажу Амона, бога Фив[5], и фараона, и Египет, и всех его богов и царей, и тех, кто полагается на фараона.26Я отдам их в руки тех, кто ищет их смерти – Навуходоносору, царю Вавилона, и его слугам. Потом Египет будет населен людьми снова, как в прежние времена, – возвещает Господь.27– А ты не бойся, слуга Мой Иаков; не пугайся, Израиль. Я тебя вызволю из далекого края, твое потомство – из земли его плена. Иаков вернется к спокойной и мирной жизни, и никто не будет его устрашать.28Так не бойся, слуга Мой Иаков, возвещает Господь, – потому что Я с тобой. Я истреблю все народы, среди которых рассеял тебя, а тебя не истреблю. Я накажу тебя по справедливости, но безнаказанным не оставлю тебя.