1آنگاه برّه را ديدم كه در اورشليم بر كوه صهيون ايستاده است. همراه او صد و چهل و چهار هزار نفر بودند كه بر پيشانیشان نام او و نام پدر او نوشته شده بود.2آنگاه، صدايی از آسمان شنيدم كه مانند ريزش آبشار و غرش رعد بود، اما در عين حال به نغمهٔ چنگنوازان نيز شباهت داشت.3اين گروه، در برابر تخت خدا و در مقابل آن چهار موجود زنده و بيست و چهار رهبر روحانی سرودی تازه میخواندند. اين سرود را كسی نمیتوانست بخواند، مگر آن صد و چهل و چهار هزار نفر كه از تمام دنيا بازخريد و آزاد شده بودند.4آنان خود را با گناهان اين دنيا آلوده نكردهاند، بلكه مثل باكره پاک هستند و هر جا برّه میرود، او را دنبال میكنند. اين اشخاص از بين مردم خريداری شدهاند تا به عنوان هديهٔ مقدس به خدا و بره تقديم شوند.5ايشان پاک و بیعيب هستند و حتی يک دروغ از دهانشان خارج نشده است.
سه فرشتهٔ
6در اين هنگام، فرشتهٔ ديگری را ديدم كه در وسط آسمان پرواز میكرد و پيغام شاد انجيل جاودانی را برای اهالی زمين میبرد تا به گوش هر قوم و قبيله، از هر زبان و نژاد برساند.7فرشته با صدای بلند میگفت: «خدا را احترام و تمجيد كنيد، زيرا وقت آن رسيده است كه مردم را داوری كند. او را بپرستيد كه آسمان و زمين و دريا و چشمهها را آفريده است.»8سپس فرشتهٔ ديگری را ديدم كه به دنبال او آمد و گفت: «بابِل، آن شهر بزرگ ويران شد، زيرا تمام قومهای دنيا را فاسد میكرد و آنها را وا میداشت تا از شراب فساد و هرزگی او مست شوند.»9سپس فرشتهٔ سوم آمد و فرياد زد: «كسانی كه آن جانور و مجسمهاش را بپرستند و علامت مخصوص او را بر پيشانی يا دست خود بگذارند،10جام غضب و مكافات خدا را كه در آن هيچ تخفيف و استثنائی نيست، خواهند نوشيد و در حضور فرشتگان مقدس و ”برّه“، در شعلههای آتش عذاب خواهند كشيد.11دود آتشی كه ايشان را عذاب میدهد تا ابد بالا میرود، به طوری كه شب و روز آسايش نخواهند داشت، زيرا آن جانور و مجسمهاش را پرستيدند و علامت نام او را بر بدن خود گذاشتند.12پس بگذاريد خلق خدا نااميد نشوند و هرگونه آزار و اذيت را تحمل كرده، دستورهای خدا را اطاعت نمايند و ايمان خود را به عيسی نگاه دارند.»13آنگاه، صدايی از آسمان شنيدم كه به من میگفت: «اين را بنويس: خوشا به حال كسانی كه در راه مسيح شهيد شدهاند. زيرا روح خدا میگويد: حالا ديگر از تمام دردها آسوده میشوند، و به خاطر كارهای خوبی كه كردهاند پاداش میگيرند.»
زمين آمادهٔ داوری است
14سپس همينطور كه نگاه میكردم، ابری سفيد ديدم كه يک نفر شبيه انسان بر آن نشسته است. بر سر او، تاجی زرّين و در دستش داس تيزی به چشم میخورد.15فرشتهٔ ديگری از درگاه خداوند آمد و به كسی كه بر ابر نشسته بود، با صدای بلند گفت: «داس را به كار بينداز و درو كن، چون وقت درو است و محصول زمين رسيده است.»16پس او كه بر ابر نشسته بود، داس خود را به كار انداخت و محصول زمين درو شد.17پس از آن، فرشتهٔ ديگری از درگاه خداوند در آسمان، سر رسيد. او نيز داس تيزی در دست داشت.18درست در همين وقت، فرشتهای ديگر از قربانگاه بيرون آمد كه قدرت و اختيار آتش در دست او بود. او به فرشتهای كه داس در دست داشت گفت: «حالا داست را به كار انداز تا خوشهها را از تاک زمين بچينی، چون انگورهايش رسيده و برای داوری آماده شده است.»19پس آن فرشته، زمين را با داسش درو كرد و انگورها را در ظرف بزرگ غضب خدا ريخت.20انگورها را در داخل آن ظرف كه در خارج شهر بود، با پا آنقدر فشردند تا رودی از خون جاری شد كه طولش ۱,۶۰۰ تير پرتاب بود و ارتفاعش به دهنهٔ يک اسب میرسيد.
1Я посмотрел и увидел Ягненка. Он стоял на горе Сион[1], и с Ним было сто сорок четыре тысячи человек, у которых на лбу было написано имя Ягненка и имя Его Отца. (2پادشاهان 19:31; مزامير 47:2; يهودى نژاد 12:22)2Я слышал шум с небес, он напоминал одновременно шум могучих вод, раскаты сильного грома и звук, который производят арфисты, играющие на своих арфах.3Они поют новую песнь перед троном, перед четырьмя живыми существами и перед старцами. Эту песнь не мог никто выучить, кроме ста сорока четырех тысяч искупленных с земли.4Это были те, кто не осквернил себя с женщинами, оставшись девственниками[2]. Они всюду шли за Ягненком, куда бы Он ни шел. Они были искуплены из всего человечества и освящены как первые плоды[3] для Бога и Ягненка. (خروج 13:1; لاويان 23:9; اعداد 3:12; اعداد 15:20; تثنيه 15:19; تثنيه 26:1)5В их словах не нашлось никакой лжи, они непорочны[4]. (صفنيا 3:13)
Три ангела
6Потом я увидел еще одного ангела, летящего посреди неба. У него была Радостная Весть, которая вечна, чтобы провозгласить ее живущим на земле – всем племенам, родам, языкам и народам.7– Бойтесь Бога, – громко говорил ангел, – и воздайте Ему славу, потому что наступил час суда Его. Поклонитесь Создавшему небо и землю, море и источники вод[5]. (خروج 20:11; مزامير 145:6)8За ним следовал второй ангел. Он говорил: – Пал, пал великий Вавилон![6] Он напоил все народы доводящим до безумия вином своего разврата[7]. (اشعيا 13:19; اشعيا 21:9; اِرميا 50:39; اِرميا 51:6)9Вслед за ними последовал третий ангел. Он громко говорил: – Кто поклоняется зверю и его изображению и кто принимает клеймо на свой лоб или на руку,10тот будет пить вино Божьей ярости, вино неразбавленное, приготовленное в чаше Его гнева, и будет мучиться в горящей сере на глазах у святых ангелов и Ягненка.11Для поклоняющихся зверю и его изображению и для принявших клеймо с его именем не будет покоя ни днем, ни ночью, и дым их мучений будет подниматься вечно[8]. (اشعيا 34:10)12Здесь от святых, соблюдающих повеления Божьи и верящих в Иисуса, требуется терпение.13И я услышал с небес голос: – Запиши: отныне блаженны те, кто умирает с верой в Господа. – Да, – говорит Дух, – теперь они отдохнут от своих трудов, и их дела следуют за ними.
Жатва на земле
14Я посмотрел и увидел белое облако. На облаке сидел Некто, «как бы Сын Человеческий»[9]. На Его голове был золотой венец, и в руке Он держал острый серп. (دانيال 7:13; متیٰ 8:20)15Затем из храма вышел еще один ангел и громко сказал Сидящему на облаке: – Пошли Свой серп и пожни, потому что время жатвы уже настало и урожай на земле уже созрел.16Тогда Сидящий на облаке бросил Свой серп на землю, и на земле был собран урожай.17Потом из небесного храма вышел еще один ангел, у него тоже в руке был острый серп.18И еще один ангел вышел от жертвенника, где он заведовал огнем. Он громко крикнул ангелу, у которого был острый серп: – Пошли твой острый серп и собери грозди винограда с виноградника земли, потому что ягоды его уже созрели.19Ангел бросил свой серп на землю, собрал виноград и кинул его в великую давильню[10] Божьей ярости.20Виноград был потоптан в давильне, которая за городом, и из нее рекой потекла кровь. Эта река крови была длиной в тысячу шестьсот стадий[11] и по глубине достигала коням до уздечек[12]. (اشعيا 63:1; يوئيل 3:13)